एक और कहानी मिली !!!
काफी रोचक लगी मुझे इसलिए सोचा क्युन न एक बार फिर से लोगो को परेशान किया जाए ।
वैसे मानव प्रवर्ती "सापेक्षता सिद्धांत" अर्थार्त "Theory of Relativity " पैर निर्भर करती है अपने दर्शनशास्त्र को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ते है ......
कहानी से पहेले आप नास्त्रोदोमस की भविष्यवाणियो के बारे मई सोचे ,माया सभ्यता मई उबलब्ध उस प्रलय के जिकर को याद करिए, या रोमांचित और रोंगटे खड़े करदेने वाली २०१२ चलचित्र के बारे मे सोचे। आखिर ये सब मीडिया की व्यापारात्मक सोच का नतीजा है ,या सच मई कोई रहस्य छुपा है जो इंसान को दिखाई नहीं दे रहा है !...
खैर ये तो प्रष्टभूमि थी शायद आपको मेरी कहानी मई कुछ रोमांच मिलजाए - परन्तु ये कहानी मैंने नहीं लिखी है काफी पुराणी को मुझे किसिने सुनायी जब कुछ - ज्ञानी -पंडित -बुद्धिजीवी और कुछ कुशल मित्रो की महेफिल जमती है थो कुछ ऐसी ही किस्से कहानी मिलते है ....
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