बस बहुत हुआ कहानी शुरू करते है
कहा जाता है महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपना सारा राज्य त्याग कर सन्यासी बन गए । पांडव अपने पौत्र अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित का राजयाभिशेक किया और हिमालय की ओर प्रस्थान किया । रजा परीक्षित अत्यंत पराक्रमी थे । स्वयं भगवान विष्णु ने जिनकी रक्षा करी हो ब्रहमास्त्र से भला वो बालक तेजस्वी ओर पराक्रमी नहीं होगा ये असंभव है ।
कहा जाता है के महाभारत के युद्ध के पश्चात् ही त्रेता युग समाप्त हुआ ओर कलयुग के अपने की घोषणा हुई । वो ही कलियुग "जिसमे हंस चुगेगा दाना तिनका ओर कावा मोती खायेगा"। कलयुग जिसमे धरती पैर पाप ही पाप होगा इसके बारे मे आप सबके पास भरपूर जानकारी है ,अतएव हम आगे बढ़ते है ।
हुआ कुछ ऐसे के कलयुग ने अपना धरती पैर पदार्पण किया परन्तु रजा परीक्षित ने उसे आने नहीं दिया । उन्होंने कहा मेरे जीते जी अधर्म, नीचता,पाप जैसी नीच प्रवर्तियो को वो मानव समाज पैर हावी नहीं होने देंगे । कलयुग मे इतना सहस नहीं था के वो राजा परीक्षित से जीत सके ।
कलयुग को थो आना था...ओर धरती पर आना था ओर होनी का लिखा कुन ताल सकता है ।परन्तु राजा परीक्षित पराक्रमी थे इस होनी को उन्होंने रोके रखा । ओर बेचारे कलयुग को शून्य मे भटकना पड़ा क्युकी बाकी सरे लोक मे जाना उसकी सीमओं से परे था ।
अब कलयुग भी कलयुग था चतुर और वाचाल । एक बार फिर धरती पर गया और राजा परीक्षित के सामने एक याचक के तरह गया और बोला :"हे राजन ये कैसा न्याय है मेरा जनम इस धरती के लिए हुआ और आप मुझे ईसे वंचित कर रहे है। ये अन्याय है धरती के लिए जन्म हुआ है मेरा थो मै भी आपकी प्रजा हुआ । और आप अपनी ही प्रजा को धरती पर रहेने की जगह नहीं दे सकते । मै कबसे शुन्य मै भटक रहा हु ,हे राजन मै एक याचक बन करा आया हु, और धरती पर न्याय समाप्त नहीं हुआ है । अत: आपको न्याय कारन होगा एक बेघर को क्या आप इतनी धरती पर कोई स्थान नहीं दे सकते । मै थो होनी हु..मुझे यहाँ से निकल कर या बिना न्याय के साथ भेजे जाने से भी अधरम और पाप बढेगा।क्युकी "यथा राजा तथा प्रजा " .
राजा परीक्षित अब धरम संकट मै फस गए और कहा " न्याय अभी समाप्त नहीं हुआ है ,और तुमने पांडव वंशी राजा से याचना की है । तुम्हारी प्राथना जरुर सुनेगे और तुम्हे रहेने का स्थान भी अवश्य देंगे । तुम धरती पर चार स्थान पर निवास कर सकते हो
१. जहा जुआ खेला जाता हो
२. जहा मदिरा पान होता हो
३. जहा परस्त्रीसंग हो
४. जहा हिंसा होती हो
इस पर कलयुग बोला- "ये स्थान बहुत सिमित है मुझे कोई और स्थान भी प्रदान करे"। इस पर राजा बोले - " अच्छी बात है क्युकी धन मै रजोगुण का वास होता है इसीलिए तुम सोने मै भी रहेसकते हो" ।
फिर क्या था कलयुग ने अपना रंग दिखाया सीधा राजा के सोने के मुक्त मै जाकर बैठ गया । फिर राजा से एक ध्यान मै मगन मह्रिषी का अपमान करवा दिया । जिसकी वजह से मह्रिषी के पुत्र ने राजा को श्राप दिया के अब से सात दिन बाद राजा की मृत्यु हो जाए । और जब मह्रिषी धयान से बहार आये और जब सारा घटना क्रम उन्हें पता चला थो उहोने अपने बेटे से कहा के उसने घोर अनर्थ कर दिया , बिना जाने समझे उसने एक महँ आत्मा को श्राप दिया है । फिर उन्होने ये सांकल किया के के आने वाले युग मै कभी किसी काछी उम्र वाले को कोई भी शक्ति या जिम्मेदारी नहीं दिजाएगी ।
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