कहानी के पत्रों के नाम मै अपने अनुसार दे रहा हु ये असल कहानी से अलग है..क्युकी मुझे याद नहीं नाम...इसके लिए शमा प्रार्थी हु।
दो राज्य थे रूपनगर और शक्तिनगर, दोनों राज्यों मै सम्बन्ध अच्छे नहीं थे । रूपनगर के राजा थे महाराज शिरोमणि, महारानी मल्लिका देवी और राजकुमारी कुसुमवती । दूसरी और शक्तिनगर का राजा था महाराज गजेन्द्र और उनका राजकुमार देवेन्द्र । खानदानी शत्रुता के कारण दोनों राज्यों के बीच मै कभी सन्धि न हो सकी और युद्ध की स्थिति हमेशा बनी रहेती थी ।
फिर एक दिन राजा गजेन्द्र और उनके बेटे ने रूपनगर पैर धावा बोल दिया। परिणाम स्वरुप महाराज शिरोमणि वीरिगति को प्राप्त हुए। उनकी पत्नी और बेटी राज्य छोड़ कर भाग निकले! परन्तु गजेन्द्र और देवेन्द्र दोनों ही अभिमानी और विलासी होने के कारण रूपनगर की रानी और राजकुमारी दोनों को खोजने लगे। क्युकी दोनों ही अप्सरा जैसी थी ।
वो दौड़ते हुए मरुस्थल मै जा पहुची और उनका पीछा करते हुए शक्तिनगर के राजा और राजकुमार।बाप-बेटे ने माँ-बेटी के पैरो के निशान देख कर जो अलग अलग दिशा मे जा रहे थे। उनको यकीन था के मरुस्थल मै वो ज्यादा दूर तक नहीं जा पएंगी। राजा गजेन्द्र ने कहा - " पुत्र अब हमने अलग अलग करके दोनों को खोजना है एक पदचिन्हों की ओर हम जायेंगे और दुसरे की तरफ तुम। जिसके पदचिन्हों का पीछा मै करूँगा उससे विवाह भी मै करूँगा। जिसके पदचिन्हों का तुम पीच अक्रोगे उससे तुम विवाह करोगे" । राजा को यकीन था के वो रानी रूपवती के पायेंग और राजकुमार कुसुमवती । परन्तु हुआ इसके विपरीत राजा को मिली राजकुमारी और राजकुमार को मिली रानी ।
इस प्रकार राजा देवेन्द्र की पत्नी हुई कुसुमवती और राजकुमार की पत्नी बनी मल्लिका देवी । नीति का विचित्र रूप देख कर हर कोई चकित था । इस पैर बेताल ने सवाल किया बता विक्रम पिता और पुत्र मै कौनसा नया रिश्ता बना ?
तो इस बार बेताल वापिस नहीं जा पाया । बेताल ने फिर सारा रहस्य बताया के तांत्रिक जिसने विक्रम से बेताल को लाने के लिए कहा ,विक्रम और बेताल तीनो ही एक ही नक्षत्र मै जन्मे है । परन्तु पूर्व जन्म के कर्मो के नीच कर्मो के कारण बेताल एक प्रेत बना वही श्रेष्ट कर्म होने के कारण विक्रम चक्रवर्ती सम्राट बना सिर्फ आचे कर्म होने के कारण तांत्रिक बना। तांत्रिक के पता चला के उसके भाग्य मै चक्रवर्ती सम्राट बाने का योग है परन्तु वो एक साधारण जीवन ही व्यतीत कर रह है। फिर तांत्रिक को पता चला के चक्रवर्ती सम्राट थो एक ही हो सकता है इसिस्लिये विक्रम बनगया है । और तांत्रिक चक्रवर्ती सम्राट तभी बन सकता है जब बाकी दोनों लोगओ की मृत्यु होजाये। इसीलिए तांत्रिक ने ये योजना बनाई के विक्रम के हाथो बेताल को उठवाकर वो तेल की कधी मै डलवा देगा और बेताल बसम होजायेगा और विक्रम से देवी माँ के आगे नतमस्तक होकर प्रणाम करने के लिए कहेगा और तभी वो विक्रम की गर्दन काटकर उसे मृत्युलोक पहुचा देगा और फिर वो स्वयं ही चक्रवर्ती सम्राट बन जायेगा।
बेताल विक्रम के न्याय,कर्त्तव्यनिष्ठा, प्रजाप्रेम और वीरता से प्रभवित था।अपनी मृत्यु से पहेले , उसने उस दुष्ट तांत्रिक का प्रयोजन विक्रम को बता कर एक अच कर्म किया और विक्रम सचेत होगया । बेताल को कढाई मै डालने के बाद जब तांत्रिक ने उससे माता के अगर झुकने को कहा..थो विक्रम ने बड़ी ही बुद्धिमानी से कहा के वो रजा है वो किसिस के आगे नहीं झुकता इसिस्लिये उसको पता ही नहीं के किस तरह से नतमस्तक हो कर झुकना होता है, इसीलिए उसने तांत्रिक से कहा के तुम मुझे उधाहरण दो । जैसे ही उद्धरण देने के लिए तांत्रिक नतमस्तक हु विक्रम ने उस तांत्रिक को मृतुलोग पहुचा दिया।
दो राज्य थे रूपनगर और शक्तिनगर, दोनों राज्यों मै सम्बन्ध अच्छे नहीं थे । रूपनगर के राजा थे महाराज शिरोमणि, महारानी मल्लिका देवी और राजकुमारी कुसुमवती । दूसरी और शक्तिनगर का राजा था महाराज गजेन्द्र और उनका राजकुमार देवेन्द्र । खानदानी शत्रुता के कारण दोनों राज्यों के बीच मै कभी सन्धि न हो सकी और युद्ध की स्थिति हमेशा बनी रहेती थी ।
फिर एक दिन राजा गजेन्द्र और उनके बेटे ने रूपनगर पैर धावा बोल दिया। परिणाम स्वरुप महाराज शिरोमणि वीरिगति को प्राप्त हुए। उनकी पत्नी और बेटी राज्य छोड़ कर भाग निकले! परन्तु गजेन्द्र और देवेन्द्र दोनों ही अभिमानी और विलासी होने के कारण रूपनगर की रानी और राजकुमारी दोनों को खोजने लगे। क्युकी दोनों ही अप्सरा जैसी थी ।
वो दौड़ते हुए मरुस्थल मै जा पहुची और उनका पीछा करते हुए शक्तिनगर के राजा और राजकुमार।बाप-बेटे ने माँ-बेटी के पैरो के निशान देख कर जो अलग अलग दिशा मे जा रहे थे। उनको यकीन था के मरुस्थल मै वो ज्यादा दूर तक नहीं जा पएंगी। राजा गजेन्द्र ने कहा - " पुत्र अब हमने अलग अलग करके दोनों को खोजना है एक पदचिन्हों की ओर हम जायेंगे और दुसरे की तरफ तुम। जिसके पदचिन्हों का पीछा मै करूँगा उससे विवाह भी मै करूँगा। जिसके पदचिन्हों का तुम पीच अक्रोगे उससे तुम विवाह करोगे" । राजा को यकीन था के वो रानी रूपवती के पायेंग और राजकुमार कुसुमवती । परन्तु हुआ इसके विपरीत राजा को मिली राजकुमारी और राजकुमार को मिली रानी ।
इस प्रकार राजा देवेन्द्र की पत्नी हुई कुसुमवती और राजकुमार की पत्नी बनी मल्लिका देवी । नीति का विचित्र रूप देख कर हर कोई चकित था । इस पैर बेताल ने सवाल किया बता विक्रम पिता और पुत्र मै कौनसा नया रिश्ता बना ?
तो इस बार बेताल वापिस नहीं जा पाया । बेताल ने फिर सारा रहस्य बताया के तांत्रिक जिसने विक्रम से बेताल को लाने के लिए कहा ,विक्रम और बेताल तीनो ही एक ही नक्षत्र मै जन्मे है । परन्तु पूर्व जन्म के कर्मो के नीच कर्मो के कारण बेताल एक प्रेत बना वही श्रेष्ट कर्म होने के कारण विक्रम चक्रवर्ती सम्राट बना सिर्फ आचे कर्म होने के कारण तांत्रिक बना। तांत्रिक के पता चला के उसके भाग्य मै चक्रवर्ती सम्राट बाने का योग है परन्तु वो एक साधारण जीवन ही व्यतीत कर रह है। फिर तांत्रिक को पता चला के चक्रवर्ती सम्राट थो एक ही हो सकता है इसिस्लिये विक्रम बनगया है । और तांत्रिक चक्रवर्ती सम्राट तभी बन सकता है जब बाकी दोनों लोगओ की मृत्यु होजाये। इसीलिए तांत्रिक ने ये योजना बनाई के विक्रम के हाथो बेताल को उठवाकर वो तेल की कधी मै डलवा देगा और बेताल बसम होजायेगा और विक्रम से देवी माँ के आगे नतमस्तक होकर प्रणाम करने के लिए कहेगा और तभी वो विक्रम की गर्दन काटकर उसे मृत्युलोक पहुचा देगा और फिर वो स्वयं ही चक्रवर्ती सम्राट बन जायेगा।
बेताल विक्रम के न्याय,कर्त्तव्यनिष्ठा, प्रजाप्रेम और वीरता से प्रभवित था।अपनी मृत्यु से पहेले , उसने उस दुष्ट तांत्रिक का प्रयोजन विक्रम को बता कर एक अच कर्म किया और विक्रम सचेत होगया । बेताल को कढाई मै डालने के बाद जब तांत्रिक ने उससे माता के अगर झुकने को कहा..थो विक्रम ने बड़ी ही बुद्धिमानी से कहा के वो रजा है वो किसिस के आगे नहीं झुकता इसिस्लिये उसको पता ही नहीं के किस तरह से नतमस्तक हो कर झुकना होता है, इसीलिए उसने तांत्रिक से कहा के तुम मुझे उधाहरण दो । जैसे ही उद्धरण देने के लिए तांत्रिक नतमस्तक हु विक्रम ने उस तांत्रिक को मृतुलोग पहुचा दिया।